मार्गदर्शिका

विवाह कुंडली

जन्म कुंडली में विवाह और साझेदारी के पारंपरिक संकेत।

सप्तम भाव

लग्न से सातवाँ भाव विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी का भाव माना जाता है। इसकी राशि, स्वामी और उसमें बैठे या उसे देखने वाले ग्रह देखे जाते हैं।

शुक्र और गुरु

परंपरा में शुक्र को विवाह और प्रेम का कारक माना जाता है, और स्त्री कुंडली में गुरु को भी पति का कारक देखा जाता है।

नवांश (D9)

विवाह के विषय में नवांश कुंडली को विशेष महत्व दिया जाता है। D1 के संकेत D9 से पुष्ट हों तो उन्हें अधिक भरोसेमंद माना जाता है।

दशा और गोचर

सप्तम भाव या उसके स्वामी, शुक्र या गुरु से जुड़ी दशा, गुरु-शनि के अनुकूल गोचर के साथ, विवाह के लिए सहायक समय का संकेत मानी जाती है। ये केवल संभावित समय-खंड हैं, निश्चित तारीख नहीं।

ज़िम्मेदार दृष्टिकोण

ज्योतिष विवाह की गारंटी या तारीख नहीं दे सकता। रिश्ते के निर्णय आपसी समझ, परिवार और व्यावहारिक बातों पर आधारित होने चाहिए।

ज्योतिष पारंपरिक व्याख्या है, वैज्ञानिक निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।