राहु काल क्या है?
राहु काल दिन का लगभग डेढ़ घंटे का वह समय है जिसे दक्षिण और पूरे भारत की पंचांग परंपरा में नए और शुभ कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। यह राहु से जुड़ा माना जाता है, जो छाया ग्रह है और परंपरा में भ्रम व अनिश्चितता का कारक कहा गया है।
राहु काल हर दिन आता है, पर उसका समय वार और आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार बदलता है। इसलिए एक शहर का राहु काल दूसरे शहर के लिए सही नहीं होता।
राहु काल की गणना कैसे होती है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। 12 घंटे के दिन में हर भाग लगभग 90 मिनट का होता है; दिन छोटा या बड़ा हो तो भाग भी उसी अनुपात में घटता-बढ़ता है।
हर वार के लिए एक निश्चित भाग राहु काल होता है (नीचे तालिका देखें)। उदाहरण: सोमवार को सूर्योदय 6:10 और सूर्यास्त 18:10 हो तो दिनमान 12 घंटे, एक भाग 90 मिनट, और दूसरा भाग यानी 7:40 से 9:10 तक राहु काल होगा।
पहला भाग कभी राहु काल नहीं होता। ध्यान रहे कि राहु काल केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के लिए निकाला जाता है।
वार अनुसार राहु काल
अनुमानित समय 6:00 सुबह सूर्योदय और 6:00 शाम सूर्यास्त मानकर दिए गए हैं। अपने शहर का सटीक समय कैलकुलेटर में देखें।
| वार | दिनमान का भाग | अनुमानित समय |
|---|---|---|
| रविवार | 8वाँ भाग | लगभग 4:30 – 6:00 शाम |
| सोमवार | 2रा भाग | लगभग 7:30 – 9:00 सुबह |
| मंगलवार | 7वाँ भाग | लगभग 3:00 – 4:30 दोपहर |
| बुधवार | 5वाँ भाग | लगभग 12:00 – 1:30 दोपहर |
| गुरुवार | 6ठा भाग | लगभग 1:30 – 3:00 दोपहर |
| शुक्रवार | 4था भाग | लगभग 10:30 – 12:00 दोपहर |
| शनिवार | 3रा भाग | लगभग 9:00 – 10:30 सुबह |
यमगंड, गुलिक काल और अभिजित मुहूर्त से अंतर
यमगंड और गुलिक काल भी दिनमान के आठ भागों में से वार अनुसार तय भाग हैं। परंपरा में यमगंड को भी नए कार्य के लिए टाला जाता है, जबकि गुलिक काल में किया गया कार्य दोहराया जाता है — इसलिए कुछ लोग इसे शुभ कार्य के लिए ठीक नहीं, पर कुछ कार्यों के लिए उपयोगी मानते हैं।
अभिजित मुहूर्त दिन के मध्य का लगभग 48 मिनट का समय है जिसे परंपरा शुभ मानती है। बुधवार को अभिजित मुहूर्त आम तौर पर नहीं लिया जाता।
परंपरा में राहु काल में क्या टाला जाता है?
नया व्यवसाय, गृह प्रवेश, सगाई या विवाह की रस्म शुरू करना, नई गाड़ी या संपत्ति की ख़रीद, महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत और बड़े अनुबंध पर हस्ताक्षर — इन्हें परंपरा में राहु काल से बाहर रखने की सलाह दी जाती है।
पहले से चल रहे कार्य, नियमित नौकरी, पढ़ाई, इलाज या आपात स्थिति के कार्य राहु काल के कारण रोकने की ज़रूरत नहीं मानी जाती। स्वास्थ्य या सुरक्षा से जुड़े निर्णय कभी समय-सारिणी के कारण न टालें।
कई परिवार राहु काल में राहु या दुर्गा की आराधना, मंत्र जप या ध्यान करते हैं — यह आस्था का विषय है।
आम भ्रांतियाँ
"राहु काल अशुभ घटना लाता है" — परंपरा केवल नए कार्य की शुरुआत के लिए इसे अनुकूल नहीं मानती; यह किसी घटना की भविष्यवाणी नहीं है।
"राहु काल हर जगह एक ही समय होता है" — नहीं, यह शहर और तिथि के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर है। अख़बारों में छपा समय अक्सर एक ही शहर का होता है।
"राहु काल और राहु महादशा एक ही हैं" — नहीं। राहु काल रोज़ का छोटा समय है, जबकि राहु महादशा जन्म कुंडली की 18 वर्ष की दशा अवधि है।
राहु काल पारंपरिक पंचांग मान्यता है, वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं। स्वास्थ्य, क़ानूनी या आर्थिक निर्णय योग्य विशेषज्ञ की सलाह से लें।