कुंडली मिलान के प्रश्न
मांगलिक दोष का परिहार
परंपरा में मांगलिक दोष कब कम या निरस्त माना जाता है, और विवाह मिलान में इसका सही स्थान।
कुंडली मिलान कैलकुलेटर →गुण अलग क्यों? →नाड़ी दोष →
पहले: दोष बनता कैसे है
जब मंगल लग्न से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो इसे मांगलिक दोष कहा जाता है। कई परंपराएँ दूसरा भाव भी जोड़ती हैं और चंद्र व शुक्र से भी जाँचती हैं — इसलिए अलग साइटें अलग परिणाम दे सकती हैं।
दोनों मांगलिक हों
सबसे अधिक माना जाने वाला परिहार: यदि वर और वधू दोनों की कुंडली में समान मांगलिक योग हो, तो परंपरा दोष को आपस में संतुलित मानती है।
मंगल की अपनी स्थिति
मंगल अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में हो, तो कई परंपराएँ दोष को कम मानती हैं। कुछ परंपराएँ विशेष भाव-राशि संयोगों में भी अपवाद देती हैं, जिन पर आचार्यों में मतभेद है।
शुभ ग्रहों का प्रभाव
मंगल पर गुरु की दृष्टि या युति, या केंद्र में बलवान शुभ ग्रह — ऐसी स्थितियों में भी परंपरा दोष को कमज़ोर मानती है।
उम्र और अन्य मान्यताएँ
कुछ लोग कहते हैं कि 28 वर्ष के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है। यह लोक-मान्यता है; सभी परंपराएँ इसे स्वीकार नहीं करतीं।
सही संदर्भ
बहुत से लोगों की कुंडली में यह योग मिलता है। केवल इसके आधार पर विवाह का निर्णय न लें, और डर दिखाकर महँगे उपाय बेचने वालों से सावधान रहें। पूरी कुंडली और दोनों पक्षों का मिलान योग्य ज्योतिषी से देखें।
ज्योतिष पारंपरिक व्याख्या है, वैज्ञानिक निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।