कुंडली मिलान के प्रश्न
नाड़ी दोष: 8 में से 0 का अर्थ
नाड़ी कूट कैसे गिना जाता है, परंपरा इसे क्यों गंभीर मानती है, और परिहार कब माना जाता है।
कुंडली मिलान कैलकुलेटर →गुण अलग क्यों? →मांगलिक परिहार →
नाड़ी क्या है?
27 नक्षत्र तीन नाड़ियों में बँटे हैं — आदि, मध्य और अंत्य। हर व्यक्ति की नाड़ी उसके जन्म नक्षत्र (चंद्र नक्षत्र) से तय होती है। अष्टकूट में नाड़ी को सबसे अधिक, 8 अंक, दिए जाते हैं।
0/8 कब आता है?
यदि वर और वधू की नाड़ी एक ही हो, तो नाड़ी कूट में 0 अंक मिलते हैं; अलग हो तो पूरे 8। बीच का कोई अंक नहीं होता। इसलिए नाड़ी दोष कुल गुणों को एक साथ 8 कम कर देता है।
परंपरा इसे क्यों गंभीर मानती है?
परंपरा नाड़ी को स्वास्थ्य और संतान से जोड़ती है। यह परंपरागत मान्यता है, चिकित्सा निदान नहीं। स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों के लिए डॉक्टर से मिलें।
परंपरागत परिहार
परंपरा में नाड़ी दोष का परिहार माना जाता है जब: दोनों की राशि एक हो पर नक्षत्र अलग हों; या नक्षत्र एक हो पर राशि अलग हो; या नक्षत्र एक हो पर चरण (पद) अलग हों। कई परंपराएँ और भी नियम जोड़ती हैं, जिन पर आचार्यों में मतभेद है।
Astravya क्या दिखाता है
कुंडली मिलान कैलकुलेटर दोनों की नाड़ी, नक्षत्र और चरण दिखाता है। नाड़ी दोष होने पर अंक 0 रहता है और परिहार की शर्तें अलग से लिखी जाती हैं, ताकि आप देख सकें कि वे लागू होती हैं या नहीं। निर्णय के लिए योग्य ज्योतिषी से पूरी कुंडली दिखाएँ।
ज्योतिष पारंपरिक व्याख्या है, वैज्ञानिक निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।