120 वर्ष का चक्र
विंशोत्तरी दशा में नौ ग्रहों की अवधि मिलाकर 120 वर्ष होती है: केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17 वर्ष।
शुरुआत कहाँ से
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसका स्वामी ग्रह पहली महादशा देता है। नक्षत्र का जितना भाग बाकी होता है, उतने अनुपात में पहली दशा शेष रहती है।
अंतर्दशा
हर महादशा के भीतर नौ ग्रहों की अंतर्दशाएँ उसी क्रम में आती हैं, और उनके भीतर प्रत्यंतर दशाएँ। परंपरा में फल महादशा और अंतर्दशा स्वामी की कुंडली में स्थिति से देखा जाता है — केवल नाम से नहीं।
यह लेख पारंपरिक ज्योतिषीय व्याख्या पर आधारित सामान्य जानकारी है, वैज्ञानिक भविष्यवाणी या पेशेवर सलाह नहीं।