शास्त्रीय ग्रंथ · हिन्दी

फलदीपिका — सरल हिन्दी परिचय

मंत्रेश्वर रचित फलित ज्योतिष ग्रंथ के विषय, पढ़ने का क्रम, विवाह भाव और 36 गुण मिलान की व्याख्या।

शास्त्रीय ग्रंथ · व्यावहारिक अध्ययन

फलदीपिका — अध्ययन विषय और मुफ़्त कैलकुलेटर

नीचे के सार हमारे अपने शब्दों में हैं, ग्रंथ के उद्धरण या श्लोक संख्या नहीं। हर विषय हमारे मौजूदा कैलकुलेटर से जुड़ा है।

अपना जन्म विवरण भरें — हर विषय कार्ड में आपकी कुंडली के तथ्य दिखेंगे। विवरण सहेजे नहीं जाते।

ग्रह और राशि

ग्रह और राशि

फलदीपिका के आरंभिक अध्याय ग्रहों और राशियों की परिभाषा देते हैं। पहले गणना की गई स्थिति देखें, फिर पारंपरिक अर्थ पढ़ें।

गणना परिणाम: हर ग्रह की निरयण राशि और अंश।

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लग्न और भाव

लग्न और बारह भाव

भाव विचार के लिए सही जन्म समय आवश्यक है; समय अज्ञात हो तो लग्न और भाव तय नहीं होते।

गणना परिणाम: लग्न और भाव स्थिति, जब जन्म समय ज्ञात हो।

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सप्तम भाव

विवाह और सप्तम भाव

विवाह विचार एक ही कुंडली में सप्तम भाव, उसके स्वामी और शुक्र से होता है।

गणना परिणाम: सप्तम भाव, उसका स्वामी और शुक्र की स्थिति।

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विंशोत्तरी दशा

विंशोत्तरी दशा

अंतिम अध्याय दशा और उसके फल पर हैं। दशा की तारीखें गणना हैं, किसी घटना की गारंटी नहीं।

गणना परिणाम: महादशा और अंतर्दशा की तारीखें।

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अष्टकूट मिलान

36 गुण मिलान (अलग परंपरा)

दो लोगों का अष्टकूट मिलान मुहूर्त परंपरा से आता है, फलदीपिका के अध्याय से नहीं — तुलना के लिए यहाँ दिया गया है।

गणना परिणाम: आठ कूटों के अंक और कुल 36 में से गुण।

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स्थितियाँ Astravya के आधुनिक निरयण इंजन (लाहिरी अयनांश) से आती हैं, इस ग्रंथ से नई प्रमाणित गणना नहीं। पारंपरिक व्याख्या वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं है।

फलदीपिका — विषय-वार हिन्दी अध्याय

हर विषय का अपना पेज और मुफ़्त कैलकुलेटर। अध्याय संख्या संस्करणों में भिन्न है, इसलिए विषय-वार क्रम।

36 गुण मिलान क्या है? आठ कूटों का बँटवारा

ऑनलाइन कुंडली मिलान (Kundli Milan online Hindi) में अष्टकूट विधि दोनों की चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र की तुलना करती है। हर कूट का अलग अधिकतम अंक है; सभी आठ कूट मिलकर कुल 36 गुण बनाते हैं।

अष्टकूट के अधिकतम अंक
कूटआधारअधिकतम गुण
वर्णचंद्र राशि का वर्ण वर्ग1
वश्यचंद्र राशि का वश्य वर्ग2
तारादोनों जन्म नक्षत्रों की परस्पर गिनती3
योनिजन्म नक्षत्र का योनि वर्ग4
ग्रह मैत्रीदोनों चंद्र राशियों के स्वामियों का संबंध5
गणजन्म नक्षत्र का गण वर्ग6
भकूटदोनों चंद्र राशियों की आपसी दूरी7
नाड़ीजन्म नक्षत्र की नाड़ी8
कुल36

यह पारंपरिक तुलना है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित वैवाहिक भविष्यवाणी नहीं। इस कैलकुलेटर में वश्य राशि से और योनि सरल 4/2/0 पैमाने पर गिनी जाती है; अन्य परंपराओं की तालिकाओं से अंक अलग हो सकते हैं।

कुंडली मिलान के सामान्य प्रश्न

अष्टकूट मिलान में अधिकतम 36 गुण होते हैं। आठ कूटों के अधिकतम अंक 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 और 8 हैं; इन्हें जोड़ने पर 36 मिलते हैं। यह कुल अंक है, विवाह की सफलता का प्रतिशत नहीं।

दोनों की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान से चंद्र राशि और नक्षत्र निकाले जाते हैं। फिर इन्हीं के आधार पर आठ कूटों के अंक जोड़े जाते हैं। केवल नाम या जन्म तिथि से समय और स्थान की अनिश्चितता दूर नहीं होती।

हाँ, ‘जन्म समय ज्ञात नहीं’ चुन सकते हैं। तब गणना दोपहर 12 बजे मानकर होती है। यदि उस दिन चंद्र राशि या नक्षत्र बदलता है तो वास्तविक गुण अलग हो सकते हैं। जन्म समय के बिना लग्न और मांगलिक स्थिति उपलब्ध नहीं होती।

नहीं। यहाँ 18 या अधिक गुण परंपरागत रूप से स्वीकार्य और 28 या अधिक उत्तम कहे जाते हैं; ये गणना के लेबल हैं, प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं। पूरे 36 गुण भी सफलता की गारंटी नहीं, और कम गुण असफलता का प्रमाण नहीं। आपसी सहमति, संवाद और जीवन मूल्यों को प्राथमिकता दें।

दोनों कुल अंकों में शामिल हैं, लेकिन उनका अलग विवरण भी पढ़ें। समान नाड़ी पर नाड़ी कूट में 0/8 और भकूट की 2–12, 5–9 या 6–8 स्थिति पर 0/7 दिखते हैं। परंपरागत परिहार के उल्लेख अपने आप अंक नहीं बढ़ाते। ये स्वास्थ्य या संतान के बारे में चिकित्सा निष्कर्ष नहीं हैं।

जन्म समय, समय क्षेत्र, अयनांश, नक्षत्र की सीमा और कूट तालिकाओं के अंतर से अंक बदल सकते हैं। Astravya में वश्य राशि-आधारित और योनि सरल पैमाने पर है: समान योनि 4, निर्धारित विरोधी जोड़ी 0, बाकी 2। पहले दोनों जगह चंद्र राशि और नक्षत्र मिलाएँ।

फलदीपिका के सामान्य प्रश्न

36 गुण वाला अष्टकूट मिलान आम तौर पर मुहूर्त ग्रंथों की परंपरा से जोड़ा जाता है। फलदीपिका विवाह को सप्तम भाव, उसके स्वामी और शुक्र से देखती है। हम किसी श्लोक संख्या का दावा नहीं करते।

परंपरा में इसका श्रेय मंत्रेश्वर को दिया जाता है। रचना काल पर विद्वानों में मतभेद है।

नहीं। यह पेज केवल व्याख्या है। कुंडली और गुण मिलान हमारे मुफ़्त कैलकुलेटर करते हैं, जो खगोलीय गणना पर आधारित हैं।

अनुवादों और संस्करणों में अध्यायों के नाम और विभाजन बदलते हैं। विषय वही रहते हैं; अपने संस्करण से मिलान करें।

फलदीपिका क्या है?

फलदीपिका दक्षिण भारतीय परंपरा का फलित ज्योतिष ग्रंथ है, जिसका श्रेय मंत्रेश्वर को दिया जाता है। प्रचलित संस्करणों में यह 28 अध्यायों में मिलता है और राशि, ग्रह, भाव, योग और दशा के फल को व्यवस्थित ढंग से बताता है।

पढ़ने का क्रम

अध्याय 1–3: राशि, ग्रह और भावों की परिभाषाएँ — आगे के अध्याय इन्हीं शब्दों पर टिके हैं।

अध्याय 4–18: वर्ग, बल, दृष्टि और बारह भावों का क्रमवार विचार।

अध्याय 19–23: भावों में ग्रह, भावेशों की स्थिति, राजयोग, धनयोग और अरिष्ट व उनका भंग।

अध्याय 24–28: विंशोत्तरी दशा, दशा फल, आयु और समापन।

विवाह और सप्तम भाव

फलदीपिका विवाह को मुख्यतः सप्तम भाव, उसके स्वामी, शुक्र और उन पर पड़ने वाले प्रभावों से देखती है। यह एक कुंडली के भीतर का विचार है।

36 गुण वाला अष्टकूट मिलान दो लोगों की चंद्र राशि और नक्षत्र की तुलना है। यह अलग, बाद में प्रचलित मुहूर्त परंपरा से आता है — इसे फलदीपिका का अध्याय मानकर न पढ़ें। नीचे दोनों का अंतर और 36 गुण की तालिका दी गई है।

ज्योतिष पारंपरिक व्याख्या है, वैज्ञानिक निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें। यहाँ के सार हमारे अपने शब्दों में हैं; ये ग्रंथ के उद्धरण या श्लोक संख्या नहीं हैं। अध्याय क्रम संस्करण के अनुसार बदल सकता है।

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